1950 से संवैधानिक हक से वंचित जनजातियों की आवाज 50 साल बाद फिर से संसद में उठाई सांसद डॉ रावत ने

डीलिस्टिंग से जनजातियों को एससी के तर्ज पर मिलेगा संवैधानिक हक
आदिवासियों को वास्तविक हक दिला कर रहेगा जनजाति सुरक्षा मंच
उदयपुर।
सांसद डॉ मन्नालाल रावत ने भारत की 720 जनजातियों की हक की आवाज सोमवार को संसद में उठाई। लगभग 60 सालों से चल रहे डीलिस्टिंग के मामले को सांसद डॉ मन्नालाल रावत ने सोमवार को फिर से संसद में उठाया और 1950 से संवैधानिक हक से वंचित मूल संस्कृति वाली अनुसूचित जनजातियों को उनका हक देने की मांग की।
सांसद डॉ मन्नालाल रावत ने लोकसभा का मानसून सत्र चालू होने के पहले ही दिन नियम 377 के अधीन सूचना के तहत 50 सालों से चल रहे डीलिस्टिंग के मामले को प्रमुखता से उठाया। सांसद डॉ रावत ने कहा कि डिलिस्टंग अनुसूचित जनजातियों की परिभाषा से संबंधित एक अत्यंत संवेदनशील विषय है। संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत अनुसूचित जनजातियों की पहचान और अधिसूचना का अधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त है और इसी के अंतर्गत वर्ष 1950 में एक अधिसूचना जारी कर अनुसूचित जनजातियों की सूची तैयार की गई थी। किंतु इस अधिसूचना में अनुसूचित जातियों की परिभाषा एवं प्रावधानों की भांति मूल संस्कृति छोड़ धर्मान्तरण करने वाले माइनोरिटी व्यक्ति को अनुसूचित जनजाति में अपात्र करने का प्रावधान नहीं है। इस बात का कई बार खुलासा हो चुका है कि जनजातियों के कुछ व्यक्ति अपनी मूल संस्कृति एवं रूढ़ीवादी परंपराओं को त्यागकर ईसाई या इस्लाम मजहब अपना चुके हैं, किंतु फिर भी वे लोग अनुसूचित जनजाति के संवैधानिक लाभ उठा रहे हैं, क्योंकि संविधान में अनुसूचित जाति के लिए तो प्रावधान कर दिए गए, लेकिन अनुसूचित जनजाति को इससे अछूता रखा गया। इससे मूल जनजातीय समाज को मिलने वाले संवैधानिक लाभ, छात्रवृतियां, नौकरियों में आरक्षण एवं विकास की राशि के हक छीने जा रहे हैं। सांसद ने आग्रह किया कि अनुसूचित जातियों की भांति ही एक सुस्पष्ट विधिक प्रावधान बनाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि जो व्यक्ति धर्मान्तरित होकर जनजातीय पुरखों की पहचान से बाहर हो गए हैं, कानूनन वे अल्पसंख्यक हो गए हैं, उन्हें अनुसूचित जनजातियों की श्रेणी से बाहर किया जाए। यह विधान संविधान की भावना, सामाजिक न्याय, विकास एवं जनजातीय अधिकारों की रक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
1970 के दशक में उठा था मामला :
सांसद डॉ रावत ने कहा कि स्मरण रहे कि 1970 के दशक में लोकसभा के 348 सांसदों ने एससी के तर्ज पर एसटी में परिभाषा को लेकर कांग्रेस के दिग्गज आदिवासी नेता डॉ कार्तिक उरांव के नेतृत्व में लोकसभा में प्रस्तुत डीलिस्टिंग बिल के समर्थन में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखा था, परंतु लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाते हुए इस बहुमत को प्रधानमंत्री ने नहीं माना और कुछ धर्मांतरित ईसाइयों के दबाव में आकर जनजातियों के अधिकारों की घोर अवहेलना की गई। लेकिन अब समय है नरेंद्र मोदी का है जो जनजातियों के विकास के बारे में समग्र व सकारात्मक दृष्टि रखते हैं। वे जनजातियों की समस्याओं को जानते हैं व जनजाति गौरव के साथ ही समस्याओं का निराकरण कर भी रहे हैं और अब वे एसटी के संवैधानिक हक के लिए वे यह कानून बना सकते हैं।
डीलिस्टिंग आंदोलन का विरोध करती है बीएपी :
सांसद डॉ रावत ने कहा कि यह भी स्मरण रहे कि डॉ भीमराव अंबेडकर के विचारों के अनुरूप आदिवासियों के संवैधानिक हक के लिए देशभर के 12 करोड़ से अधिक, 22 राज्यों के आदिवासियों द्वारा सामाजिक स्तर पर चलाए जा रहे डीलिस्टिंग आंदोलन का विरोध डूंगरपुर बांसवाड़ा में सक्रिय बीएपी पार्टी ने किया है। इसका आशय है कि यह पार्टी केवल धर्मांतरित लोगों के साथ खड़ी हैं ना कि मूल संस्कृति वाले आदिवासियों के साथ।
कांग्रेस अपनी गलतियों को फिर से सुधारे :
जनजाति सुरक्षा मंच के राष्टीय संगठन मंत्री सूर्य नारायण सुरी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सांसद मन्नालाल रावत ने डीलिस्टिंग मामले को संसद में उठाकर जनजातियों के लिए बहुत ही सराहनीय कदम उठाया है। कांग्रेस के दिग्गज आदिवासी नेता डॉ कार्तिक उरांव ने 1977 में लोकसभा में प्रस्तुत डीलिस्टिंग बिल के समर्थन में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखा था। इसको समझते हुए कांग्रेस के नेता अपनी गलतियों को सुधारे और डीलिस्टिंग मामले को समर्थन दें।
जनजाति सुरक्षा मंच के राजस्थान संयोजक लालू राम कटारा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि डीलिस्टिंग का मुद्दा 1970 से चल रहा है। मंच ने इसको लेकर कई रैलियां और आंदोलन किए हैं। मंच प्रयासरत है और सांसद मन्नालाल रावत ने इस मामले को फिर से संसद में रखकर बेहतरीन कदम काम किया है। वे डॉ कार्तिक उरांव का सपना पूरा करेंगे। कांग्रेस का अलग एजेंडा हो सकता है, लेकिन सामाजिक विषय है। इस पर कांग्रेस नेताओं को भी आगे आना चाहिए था।

Related posts:

Hindustan Zinc Massive Sweep at the 21st Chapter Convention on Quality Concept

गोवर्धन सागर में दीपदान कर जल संरक्षण का संकल्प लिया

हिन्दुस्तान जिंक की समाधान से जुडे़ किसान उगा रहें हाईवेल्यू फल और सब्जियां

केन्द्रीय संचार ब्यूरो द्वारा राष्ट्रीय एकता दिवस पर दो दिवसीय प्रदर्शनी का समापन

नवनियुक्त कलेक्टर का नारायण सेवा ने किया स्वागत

ऊबर ने लाखों पीपीई किट्स वितरित किये

पिम्स हॉस्पिटल में वर्षा जल संरक्षण कार्यक्रम आयोजित

हिन्दुस्तान ज़िंक ने अब तक देश के ख़ज़ाने में 1.7 लाख करोड़ का योगदान दिया : अनिल अग्रवाल

पिम्स हॉस्पिटल उदयपुर  में फ़ौरन बौडी के कारण बार-बार फेफड़ों के संक्रमण के अनोखे मामले का सफलतापूर्...

उदयपुर से अच्छी खबर: कोरोना रोगियों का ग्राफ़ घटते घटते 14.87 हुआ, आज 401 रोगी संक्रमित आये

हिंदुस्तान जिंक को सस्टेनेबल प्रेक्टिस के लिए भारतीय खान ब्यूरो से 5-स्टार रेटिंग

महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन के 41वें सम्मान समारोह में डॉ. लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ ने किया 78 विद्यार्थियों ...