उदयपुर में सोमनाथ शिवलिंग का भगवान महाकाल से होगा मिलन

उदयपुर में सोमनाथ शिवलिंग भारत यात्रा 30 दिसंबर को
महाकालेश्वर मंदिर में होगी स्वागत यात्रा, महारूद्राभिषेक एवं ज्योतिर्लिंग दर्शन
उदयपुर (डॉ. तुक्तक भानावत)।
 सोमनाथ शिवलिंग भारत यात्रा 30 दिसम्बर को उदयपुर में होगी। यहां पर महाकाल मंदिर में दोनों शिवलिंग और महाकाल का मिलन कराया जाएगा। इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए बड़ी संख्या में भक्तगण शामिल होंगे।
सोमनाथ मंदिर के मूल शिवलिंग अंश श्रद्धालुओं के लिए उदयपुर के महाकाल मंदिर में प्रदर्शित किया जाएगा। सरदापुरा स्थित गीता सदन में आयोजित प्रेसवार्ता में आर्ट आफ लिविंग वैदिक धर्म संस्थान समन्वयक और प्रशिक्षिका प्रियंका शर्मा ने बताया कि शिवलिंग का उदयपुर में पूजन किया जाएगा। सोमनाथ मंदिर के मूल शिवलिंग के कुल 11 अंश अग्निहोत्री ब्राह्मण ने अपने पास रखे थे, जिन्हें श्रीश्री रविशंकरजी को दिया गया था। गत वर्ष से यह अंश देश के प्रमुख शहरों में दर्शन के लिए ले जाए जा रहे हैं। प्रियंका ने बताया कि शिवलिंग के जो अंश उदयपुर लाए जा रहे हैं, उनका महाकाल से मिलन कराया जाएगा और उसके बाद महारूद्राभिषेक का आयोजन होगा।  
आर्ट आफ लिविंग प्रशिक्षक गिरधारी लाल गर्ग ने बताया कि बेंगलुरु से आए पंडित द्वारा ज्योर्तिलिंग का विधिवत रुद्र पूजा एवं वैदिक मंत्रोच्चारण किया जाएगा। उदयपुर में 30 दिसंबर को महाकालेश्वर मंदिर में खास कार्यक्रम होगा। आर्ट आफ लिविंग की प्रशिक्षक रजनी जोशी ने बताया कि यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक चेतना के प्रसार की दृष्टि से भी उदयपुर के लिए एक अविस्मरणीय क्षण बनने वाला है। यहां श्रद्धालुओं के हृदय में आस्था, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार इसके दर्शन के साथ ही होगा।
आर्ट आफ लिविंग प्रशिक्षक इशविन सच्चर ने बताया कि गुरुदेव श्रीश्री रविशंकरजी के निर्देशानुसार जब उन शिवलिंगों पर भू वैज्ञानिकों ने अनुसंधान किया तो उन्हें पता चला कि ये शिवलिंग जिस पदार्थ से बने हैं, वह पदार्थ इस धरती पर उपलब्ध ही नहीं हैं। अपने शास्त्रों में भी सोमनाथ के ज्योतिर्लिंग को चंद्रमा द्वारा प्रदत्त और पूजित बताया गया है।
महमूद गजऩी ने तोड़ा था सोमनाथ मंदिर :
सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजऩी के आक्रमण (1026 ईस्वी) के दौरान खंडित होने पर अग्निहोत्री ब्राह्मणों द्वारा संरक्षित किए गए और दक्षिण भारत लाए गए, जिन्हें बाद में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकरजी को सौंपा गया था। रविशंकरजी के प्रयास से विभिन्न शहरों में दर्शन के लिए भेजे जा रहे हैं। बताया जाता है कि प्राचीन शिवलिंग चुंबकत्व के कारण हवा में तैरता था और ये अंश उसी के प्रतीक हैं, जो अब भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव करा रहे हैं।
100 साल पहले शंकराचार्य ने कहा था- ‘शंकर’ को देने हैं अंश :
दक्षिण भारत के अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने लगातार इन शिवलिंग के अंश का पूजन किया। सन् 1924 में अग्निहोत्री ब्राह्मण कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य के पास शिवलिंग लेकर गए तो उन्होंने कहा कि 100 साल बाद जब राममंदिर बन जाएगा तो कर्नाटक के बेंगलुरु में ‘शंकर’ नाम के संत को यह सौंप देना। वे ही इनका सही धार्मिक उपयोग करेंगे। बताया गया है कि महमूद $गजनी के सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण के बाद ज्योतिर्लिंग खंडित हो गया था। इसके 11 अंश साउथ इंडियन अग्निहोत्री परिवार के पास थे, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी उनका विधिविधान से पूजन कर रहे थे। लगभग 100 साल बाद अग्निहोत्री परिवार की पीढ़ी ने इन अंशों को आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकरजी को सौंपा। इसके बाद श्रीश्री रविशंकर ने करोड़ों हिंदुओं के दर्शन और पूजन के लिए सोमनाथ शिवलिंग भारत यात्रा शुरू की। यह यात्रा 12 राज्यों और 140 शहरों से होकर गुजर रही है।

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