उदयपुर की धरा पर हजारों श्रद्धालुओं ने दीपदान कर की भैरव जी की आराधना

– जगद्गुरु पूज्यपाद श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी का आशीर्वाद लिया श्री जी हुजूर, मंत्री श्री दक ने
– ममहोत्सव परिसर में श्री महाराणा प्रताप की 25 फीट ऊंची विशाल प्रतिकृति पर की पुष्पांजलि अर्पित
उदयपुर (डॉ. तुक्तक भानावत)।
जैसे ही श्रद्धालुओं की थालियों में हजारों दीप प्रज्ज्वलित होते ही जैसे ही जगद्गुरु श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज के श्रीमुख से सस्वर मंत्र पाठ शुरू हुआ तो लगा, मानो साक्षात भगवान भैरव, भक्तों को आशीर्वाद देने आये हों। यह दृश्य कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु पूज्यपाद श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज के श्रीमुख से उद्धरित श्री एकलिंगजी शिव पुराण कथा के सातवें दिवस जनसमुदाय ने निहारा और भक्ति में लीन हो गए।
समिति के अध्यक्ष नानालाल बया, महामंत्री देवेन्द्र मेहता ने बताया कि जगद्गुरु देव ने करीब 25 मिनट अनवरत मंत्रोच्चार किया और श्रद्धालुओं ने आभास किया कि प्रभु भैरव उनपर आशीर्वाद बरसा रहे हैं।  भैरव कृपा प्राप्ति के लिए यह विशेष साधना करवाई गई।


जगद्गुरु शपूज्यपाद श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज की पावन निश्रा में अनवरत जारी श्री महालक्ष्मी कुंकुमार्चन यज्ञ पूजा साधना महामहोत्सव में श्रद्धालुओं की संख्या हर दिन बढ़ रही है। हजारों लोग प्रतिदिन भोजन प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं।
भगवान शिव ने सृष्टि में एकमात्र पुनीतवती को मां पुकारा :
एकलिंगजी शिव पुराण कथा में पूज्यपाद गुरुदेव ने पुनीतवती के जीवन चरित्र और भगवान शिव के प्रति अगाध आस्था के प्रसंग का वर्णन किया। पुनीतवती के पति अपने लिए दो आम लाते हैं और सुरक्षित रखने को कहते हैं। पति का स्वभाव क्रोधी था। इस बीच एक सन्यासी आकर भिक्षा में भोजन मांगते हैं। पुनीतवती धर्म परायण थी इसलिए साधु को खाली हाथ नहीं जाने देना चाहती थी। घर मे भोजन नहीं बना तो पुनीतवती ने दो में से एक आम साधु को दे दिया। पति लौटने वाले थे पुनीतवती पतिवृता स्त्री थी इसलिए पति को भी नाराज नहीं करना चाहती थी। पति का डर भी था। पुनीतवती ने अपने आराध्य शिव की आराधना प्रारंभ की और प्रभु से एक आम मांगा।

शिव ने कृपा की और स्वादिष्ट आम प्रकट हुआ। पति के आते ही उन्हें पुनीतवती ने दो आम सौंप दिए। दूसरा आम खाकर पति ने आश्चर्य जताया और कहा इतना स्वादिष्ट आम कहां से आया मैं जो लाया वह आम तो ऐसे न  थे। पुनीतवती ने सबकुछ सच बता दिया। इससे पति कुपित हो गए और कहा कि यदि ऐसा है तो शिव जी से एक और आम लाकर दिखाने का प्रमाण मांगा। पुनीतवती ने पुनः शिव आराधना की और शिव से आशीर्वाद में आम मांगकर ले आई। पति के मन मे शंका पहले से थी, यह देख पति और क्रोधित हो गया और पुनीतवती को छोड़ गया। पुनीतवती दुखी हो गई। पुनीतवती शिव आराधना में लीन हो गई। कुछ बरसों बाद दूसरी पत्नी और एक संतान के साथ पति पुनीतवती के पास पहुंचा और पश्चाताप करते हुए क्षमा मांगने लगा। यह दृश्य देख पुनीतवती मन ही मन टूट गई। उसने प्रभु शिव से प्रार्थना की कि अब यह शरीर मेरे किस काम का, मेरा यौवन हर लो, पिशाच स्वरूप दे दो और मुझे अपनी शरण मे ले लो। शंकर के वरदान से कंकाल मे बदल चुकी पुनीतवती इस ब्रह्मांड की अकेली शिव साधक हैं जिन्हें शिव ने मां कहकर पुकारा। पुनीतवती दक्षिण से कैलाश पर्वत तक हाथों के बल चलकर गई और प्रभु शिवजी की साधना की। शिवजी ने प्रसन्न होकर पुनीतवती को वरदान दिया कि चिरंजीवी होकर पूजी जाओगी। आज भी दक्षिण में वट वृक्षों का जंगल है जहां चारदीवारी के बीच देवी पुनीतवती का मंदिर विद्यमान है।
श्री जी हुजूर ने लिया गुरुदेव का आशीर्वाद :
कथा में आसन्दी पर विराजित जगद्गुरु श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज से भेंट करने मेवाड़ राजवंश के श्री जी हुजूर, एकलिंगजी के 77 वें दीवान श्री लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ उपस्थित हुए। आपने पूज्य गुरुदेव का आशीर्वाद लेकर जगद्गुरु देव जी को माल्यार्पण किया। पूज्यपाद जगद्गुरू देव जी द्वारा श्री जी हुजूर को सर्वमंगल का आशीर्वाद दिया गया। साथ ही गुरुदेव द्वारा श्री जी हुजूर को समृद्धि कलश भेंट किया गया। श्री जी हुजूर ने गुरुदेव के चरणों में खड़े होकर पूरी कथा का रसास्वादन किया। कथा समाप्ति के पश्चात हजारो श्रद्धालुओं की मौजूदगी में गुरूदेव की निश्रा में श्री जी हुजूर ने महोत्सव प्रांगण में स्थापित की गई महाराणा प्रताप जी की 25 फीट ऊंची प्रतिकृति के सम्मुख पुष्पांजलि अर्पित की।
राजस्थान सरकार के सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन मंत्री श्री गौतम दक एवं नारायण सेवा संस्थान के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रशांत अग्रवाल ने भी पूज्यपाद जगद्गुरु श्री वसंत विजयानन्द जी की शरण पहुंचकर आशीर्वाद लिया। अतिथियों का आयोजन समिति की ओर से प्रमुख पदाधिकारी शंकेश जैन, देवेंद्र मेहता, मुकेश चेलावत, रितेश जैन, राजकुमार जैन आदि द्वारा उपरना ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंटकर अभिनन्दन किया गया।

सोमवार को श्री महालक्ष्मी कुंकुमार्चन महायज्ञ की महापूर्णाहूति :

मीरा नगर में 28 दिसंबर से आरंभ हुए श्री महालक्ष्मी कोटि कुंकुमार्चन पूजा, महायज्ञ महोत्सव की महापूर्णाहूति सोमवार 5 जनवरी को होगी। पूज्यपाद जगद्गुरु देव श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज के पावन सानिध्य में चल रहे 9 दिवसीय धर्म महोत्सव में प्रतिदिन की साधना, महालक्ष्मी यज्ञ, और शिव पुराण कथा का समापन विधि विधान से होगा।

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