पर्यावरण व मानव स्वास्थ्य बेहतर बनाने गौ माता व धरती माता का संरक्षण आवश्यक – सांसद डॉ रावत

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत कृषि सखियों के प्रशिक्षण का शुभारंभ
उदयपुर।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अन्तर्गत कृषि सखियों के पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण का शुभारम्भ विद्या भवन कृषि विज्ञान केन्द्र, बड़गांव में उदयपुर लोकसभा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत के मुख्य आतिथ्य एवं अटारी जोधपुर के निदेशक डॉ. जेपी मिश्र के विशिष्ट आतिथ्य में हुआ। कृषि विभाग के सहयोग से आयोजित यह प्रशिक्षण 31 अगस्त तक चलेगा। इसमें उदयपुर जिले की 50 कृषि सखियां भाग ले रही हैं।
शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए सांसद डॉ. रावत ने कहा कि पर्यावरण व मानव स्वास्थ्य बेहतर बनाने के लिए गौ माता व धरती माता का संरक्षण आवश्यक है। इसी पुनीत और मानव कल्याण से जुड़े कार्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि कृषि सखियां प्रशिक्षण में प्राकृतिक खेती को सीख कर आगे बढ़ावा दें। प्राकृतिक खेती की संपूर्ण जानकारी लें एवं प्रायोगिक सीख कर जाएं ताकि अन्य किसानों को भी फायदा होगा।


विशिष्ट अतिथि डॉ. मिश्र ने प्राकृतिक खेती की आवश्यकता क्यों हुई, प्राकृतिक खेती का उद्देश्य, इसके स्तम्भ पर गहन चर्चा की। उन्होंने कहा कि जमीन स्तर पर प्राकृतिक खेती को धरातल पर ले जाना, चुनौती है। अतः इसे सक्रिय रूप में बढ़ावा व योगदान देने की आवश्यकता है। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं संस्था प्रमुख डॉ. पी. सी. भटनागर ने प्राकृतिक खेती में प्रशिक्षण का पूर्ण विवरण दिया। डॉ. भटनागर ने केन्द्र की विभिन्न गतिविधियों के बारे में बताते हुए प्राकृतिक खेती पर केन्द्र द्वारा पूर्व मे किये गये कार्यों को साझा किया तथा प्राकृतिक खेती इकाई की भी जानकारी दी।
अतिरिक्त निदेशक, कृषि निरंजनसिंह राठौड ने कहा कि प्राकृतिक खेती को आगे से आगे बढ़ाएं। समाजसेवी दीपक शर्मा ने बताया कि सखियां प्राकृतिक खेती को धरातल स्तर पर ले जाएं ताकि माननीय प्रधानमंत्री और देश का सपना पूरा होगा।
संयुक्त निदेशक, कृषि विस्तार सुधीर वर्मा ने बताया कि रसायन से जो हिंसक खेती हो रही है उससे तथा पर्यावरण को प्रदुषित होने से बचाया जाए, साथ ही उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने हेतु प्रोत्साहित किया और बताया कि इसमें सभी उत्पाद गौ आधारित होंगे। प्रशिक्षण में 50 सखियो ने भाग लिया। ये सखियां 125 कृषकों को प्रशिक्षित करेंगी। इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षित एवं पोषक खाद्य उपलब्ध करना है। हर 10 क्लस्टर पर एक बी.आर.सी. बनेगा। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के नोडल अधिकारी डॉ. भगवतसिंह चौहान ने पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में बताया कि इसमें प्राकृतिक खेती के मुख्य घटकों बीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत, अग्निस्त्र, ब्रहमास्त्र, नीमास्त्र, दसपर्णी अर्क व अन्य घटकों की सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक कक्षाएं होंगी। अतिथियों ने गो पूजन तथा पौधारोपण भी किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. भगवतसिंह ने किया। धन्यवाद डॉ. दीपक जैन ने ज्ञापित किया।

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