विजन दस्तावेज – 2030 तैयारी बैठक में दिये महत्त्वपूर्ण सुझाव

उदयपुर। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राज्य सरकार प्रदेश के चहुंमुखी विकास, प्रदेशवासियों की खुशहाली एवं उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने तथा राजस्थान को वर्ष 2030 तक देश का अग्रणी राज्य बनाने के उद्देश्य से विकसित राजस्थान हेतु विजन दस्तावेज – 2030 तैयार किया जा रहा है।
इसी क्रम प्रमुख शासन सचिव, पर्यटन की अध्यक्षता में होटल आनन्द भवन में पर्यटन क्षेत्र से संबंधित हितधारकों, प्रबुद्धजनों, विषय विशेषज्ञों के साथ बैठक आयोजित की गई। इसमें मिशन 2030 के अन्तर्गत दस्तावेज तैयार करने हेतु सुझाव आमंत्रित किये गये। बैठक की रूप रेखा बताते हुए सुश्री शिखा सक्सेना, उपनिदेशक ने बताया कि पर्यटन कला एवं संस्कृति मिशन 2030 का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो सरकार की नीतियों को लागू करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। पर्यटन के क्षेत्र में मिशन मोड़ पर कार्य करते हुए राजस्थान अन्य विकसित राज्यों की भांति भारत का अग्रणी राज्य बन सकता है ऐसी पर्यटन क्षेत्र में अपार सम्भावनायें है।
बैठक के शुरूआत में विभाग द्वारा तैयार प्रमोशन फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। इसमें राजस्थान की ‘कुछ लगे अपना सा एवं रोमांस ऑफ राजस्थान’ प्रमुख फिल्मों का प्रदर्शन किया गया।
प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बताया कि हम सभी ऐसे मंच पर चर्चायें कर सकते हैं। उसे धरातल पर लाने हेतु सभी विभागों के सहयोग एवं ट्यूरिज्म से जुड़े सेगमेन्ट की जरूरत होगी। इसमें हमें शहर की स्वच्छता को बनाये रखने की आवश्यकता है। विश्व की जीडीपी में पर्यटन का 10 प्रतिशत योगदान है। इसमें राजस्थान का 14 प्रतिशत योगदान है। मिशन 2030 के अन्तर्गत राजस्थान में पर्यटन का 20 जीडीपी रखने का लक्ष्य है।
राजस्थान साहित्य अकादमी अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने साहित्य के माध्यम से पर्यटन प्रचार एवं आदिवासी क्षेत्र के सौन्दर्य एवं प्राकृतिक विविधता को अक्षुण बनाये रखने हेतु सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यात्रा करने वालों के यात्रा वृतान्त को भी साहित्य के माध्यम से प्रचार किया जा सकता है।
उदयपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज के अध्यक्ष संजय सिंघल ने बताया कि शहर में अधिक संख्या में ट्यूरिस्ट आ रहे हैं। उनके लिये प्लानिंग की आवश्यकता है जिससे पर्यटन को अधिक बढ़ावा मिले तथा पर्यटकों का और अधिक ठहराव बढ़ सके। इससे केरिंग केपिसिटी अनुसार पर्यटक का ठहराव हो एवं कस्टमर सेटिसफेकशन हो सके। इसके अतिरिकत वेस्ट डिस्पोज, पीपीपी मोड़ यातायात, गार्डन, आयड़ की रिवर साईट को विकसित करने, अतिरिक्त हेलिपेड बनाने पर जोर दिया।
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष धीरज दोशी, सुदर्शनदेव सिहं, यशवर्धन सिंह, जतिन श्रीमाली, राजेश अग्रवाल ने शहर में आधारभूत सुविधायें विकसित करने, पर्यटकों की सुरक्षा करने, धार्मिक पर्यटन बढ़ाने हेतु जोर दिया। एडवेन्चर ट्यूर साईट के रिषिराज सिंह ने कारवां ट्यूरिज्म बढ़ाने हेतु नीति में समावेश करने का निवेदन किया जिसमें हिडन डेस्टिनेशन व सिनेमानिटक स्थलों को सम्मिलित करने के सुझाव दिये। पैराग्लाईडिंग से समर्थ द्वारा ऑफ बीट स्थल में एडवेन्चर प्रामोट करने तथा ऐसी गतिविधियों हेतु अनुमति प्रक्रिया एवं निर्धारण व्यक्त किया।
मीनाक्षी पालीवाल ने अनुमति प्रक्रिया को सरलीकरण करने की बात कही। वाटर स्पोर्टस हेतु आरटीओ से सिंघल विन्डों क्लियरेन्स को सरलीकरण का सुझाव दिया तथा उतराखण्ड एवं हिमाचाल जैसे राज्यों की तरह ही वाटर स्पोर्टस को दी जाने वाली सब्सिडी की तरह राजस्थान में किये जाने का सुझाव दिया। कारवां ने पार्किंग हेतु सरकारी भूमि के चिन्हीकरण का सुझाव दिया। पेइंग गेस्ट हाउस संचालक ने बताया कि पेइंग गेस्ट हाउस में विद्युत कनेक्शन वाणिज्यिकी दर के स्थान पर घरेलू दर से होना चाहिये। गांवों में रहने वालों को पेइंग गेस्ट की अनुमति दी जाये जिससे आने वाले पर्यटक वहां की संस्कृति का लाभ ले सके। रमेश वैष्णव ने ट्रेकिंग एण्ड माउण्टेरिंग की अनुमति हेतु मिशन में उपयुक्त प्रावधान करने हेतु निवेदन किया गया।
ट्रेवल एजेन्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष नरपत सिंह द्वारा बताया कि पर्यटन के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सेवाओं हेतु धैर्य की आवश्यकता है। विरासत संस्था के महेश आमेटा ने राजस्थानी फोक डान्स व संगीत को विदेशों में प्रस्तुतियां देने हेतु मिशन में इस तरह का सुझाव सम्मिलित करने हेतु अपने विचार व्यक्त किये। दिग्विजय राणावत ने पर्यटक सहायता बल को सशक्त करने तथा ट्यूरिस्ट ओरियेन्टेड प्रशिक्षण हेतु सुझाव दिया तथा गाईड को प्रत्येक स्थल पर प्रवेश की अनुमति देने का प्रावधान किया जाये। धन्यवाद सुश्री समिता सरोच, संयुक्त निदेशक पर्यटन ने दिया।

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