सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों एवं रोजगार प्रोत्साहन योजनाओं पर ईपीएफओ की प्रेसवार्ता आयोजित

उदयपुर। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के क्षेत्रीय कार्यालय, उदयपुर परिसर में आज एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए अजीत कुमार, अतिरिक्त केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त एवं अंचल प्रमुख, राजस्थान ने कहा कि ईपीएफओ देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को अधिक व्यापक, समावेशी, तकनीक आधारित और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। इस अवसर पर क्षेत्रीय कार्यालय, उदयपुर के प्रभारी एवं क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त पी. के. सिन्हा, भी उपस्थित रहे।
अजीत कुमार ने बताया कि भारत सरकार द्वारा श्रमिक कल्याण, आर्थिक विकास तथा ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस के बीच संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को 4 श्रम संहिताओं में समाहित किया गया है। इनमें सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 स्वतंत्र भारत के सबसे महत्वपूर्ण श्रम सुधारों में से एक है, जिसका उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा का सार्वभौमिक विस्तार, अनुपालन प्रक्रियाओं का सरलीकरण, डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा तथा पारदर्शिता में वृद्धि करना है।
सामाजिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत नई ईपीएफओ योजनाएँ :
उन्होंने बताया कि 29 जून 2026 को सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत ईपीएफओ की तीन नई योजनाओं की अधिसूचना जारी की गई, जो सामाजिक सुरक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम है। ये योजनाएँ हैं—
1. कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026  
   (Employees’ Provident Fund Scheme, 2026)
2. कर्मचारी पेंशन योजना, 2026  
   (Employees’ Pension Scheme, 2026)
3. कर्मचारी जमा सम्बद्ध बीमा योजना, 2026  
   (Employees’ Deposit Linked Insurance Scheme, 2026)
नई योजनाओं का उद्देश्य मूल सामाजिक सुरक्षा लाभों को यथावत रखते हुए प्रक्रियाओं को सरल बनाना तथा तकनीक आधारित प्रशासन के माध्यम से सेवा वितरण को और अधिक प्रभावी बनाना है।
ईडीएलआई योजना, 2026 की प्रमुख विशेषताएँ :
– सदस्य के परिवार को ₹7 लाख तक का बीमा सुरक्षा कवरेज उपलब्ध होगा।
– 12 माह अथवा उससे अधिक सेवा वाले सदस्यों के लिए न्यूनतम ₹2.50 लाख का बीमा लाभ सुनिश्चित किया गया है।
– 12 माह से कम सेवा वाले सदस्यों के लिए भी न्यूनतम ₹50,000 का बीमा लाभ उपलब्ध रहेगा।
कर्मचारी नामांकन अभियान (EEC) – 2026 :
ईपीएफओ द्वारा 1 जुलाई 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक विशेष कर्मचारी नामांकन अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य उन पात्र कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है जो संस्थानों में कार्यरत होने के बावजूद ईपीएफ कवरेज से बाहर रह गए थे।
योजना की प्रमुख विशेषताएँ :
– 1 अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2026 के बीच नियुक्त तथा वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा।
– जिन कर्मचारियों के वेतन से कभी कर्मचारी अंशदान नहीं काटा गया, उनके लिए कर्मचारी अंशदान को पूर्णतः माफ किया जाएगा।
– नियोक्ताओं को केवल नियोक्ता अंशदान, ब्याज तथा प्रशासनिक शुल्क जमा करना होगा।
– विलंब क्षति राशि को केवल ₹100 रखा गया है।
– यह योजना स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करते हुए सामाजिक सुरक्षा कवरेज को व्यापक बनाएगी।
एमनेस्टी योजना – 2026 :
अजीत कुमार ने बताया कि एमनेस्टी योजना उन प्रतिष्ठानों के लिए एक बार का अवसर है जो औपचारिक छूट अधिसूचना के बिना भविष्य निधि ट्रस्ट संचालित कर रहे हैं।
मुख्य विशेषताएँ :
– पात्र मामलों में पूर्व प्रभाव से ट्रस्ट की स्थिति का नियमतीकरण।
– न्यूनतम अनुपालन अवधि तथा कॉर्पस संबंधी शर्तों में छूट।
– पुराने विवादों और मुकदमों में कमी।
– योजना की प्रारंभिक अवधि छह माह निर्धारित की गई है।
विश्वास योजना – 2026 :
यह योजना विलंबित ईपीएफ अंशदान जमा मामलों के समाधान हेतु लाई गई है।
मुख्य विशेषताएँ :
– विलंबित भुगतान पर लगने वाली क्षति राशि को तर्कसंगत एवं काफी कम किया गया है।
– यह योजना 14 जून 2024 से पूर्व की अंशदान अवधि से संबंधित मामलों पर लागू होगी।
– योजना के अंतर्गत निपटान होने पर लंबित मुकदमे एवं अपीलें समाप्त मानी जाएंगी।
– इससे नियोक्ताओं की अनुपालन लागत में कमी आएगी और विवाद निपटान प्रक्रिया सरल होगी।
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना  :
ईपीएफओ के माध्यम से संचालित यह भारत सरकार की प्रमुख रोजगार आधारित योजना है, जिसका उद्देश्य औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देना तथा प्रथम बार रोजगार प्राप्त करने वाले युवाओं और अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करना है।
प्रथम बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों के लिए लाभ :
– ईपीएफओ में पहली बार पंजीकरण कराने वाले कर्मचारियों को लाभ।
– ₹1 लाख प्रतिमाह तक वेतन पाने वाले कर्मचारी योजना के पात्र हैं।
– छह माह की सेवा पूर्ण होने के बाद पात्र कर्मचारियों के खातों में प्रोत्साहन राशि सीधे जमा की जाती है।
– योजना युवाओं को संगठित क्षेत्र में रोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
– वित्तीय समावेशन एवं दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देती है।
नियोक्ताओं के लिए लाभ :
– अतिरिक्त एवं स्थायी रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को वित्तीय प्रोत्साहन।
– उद्योगों को अधिक रोजगार सृजन के लिए प्रोत्साहन।
– औपचारिक रोजगार एवं ईपीएफ कवरेज के विस्तार में सहायता।
– विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान।
– पात्र प्रतिष्ठानों को लगभग ₹54 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित की जा चुकी है।
उदयपुर क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना का प्रभावी क्रियान्वयन देखने को मिला है। ईपीएफओ उदयपुर के अंतर्गत पंजीकृत 4,722 अंशदायी संस्थानों में से 4,095 संस्थान योजना के तहत पंजीकृत हो चुके हैं। साथ ही 1,062 प्रथम बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है तथा उनके खातों में अब तक लगभग ₹49.21 लाख (₹49,20,832) की वित्तीय सहायता सीधे जमा की जा चुकी है।
सदस्य सेवाओं का सरलीकरण :
ईपीएफओ द्वारा नागरिक-केंद्रित कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए गए हैं—
– Centralized Pension Payment System (CPPS) का क्रियान्वयन।
– पेंशनभोगियों की सुविधा हेतु इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के साथ समझौता।
– अग्रिम निकासी के 13 अलग-अलग प्रावधानों को सरल बनाकर एकीकृत व्यवस्था विकसित की गई।
– सभी प्रकार की निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि को घटाकर 12 माह किया गया।
– सदस्य बीमारी, शिक्षा, विवाह एवं आवास जैसे उद्देश्यों के लिए अपनी पात्र राशि का 75 प्रतिशत तक अग्रिम निकासी कर सकते हैं।
ईपीएफओ का डिजिटल परिवर्तन :
अजीत कुमार ने बताया कि ईपीएफओ देश के सबसे बड़े डिजिटल परिवर्तन कार्यक्रमों में से एक को लागू कर रहा है।
मुख्य पहलें :
– पात्र दावों का स्वत: निपटान।
– CITES 2.01 प्लेटफॉर्म का उपयोग।
– ऑनलाइन केवाईसी एवं प्रोफाइल अद्यतन सुविधा।
– वर्ष 2025-26 के लगभग 80 प्रतिशत वार्षिक खातों में 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की प्रविष्टि अधिसूचना जारी होने के एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध करा दी गई।
ईपीएफओ राजस्थान द्वारा नियमित रूप से निम्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं—
– प्रत्येक माह की 27 तारीख को “निधि आपके निकट” कार्यक्रम।
– हितधारकों के साथ संवाद हेतु “संवाद से विश्वास” बैठकें।
– “ऑफिसर ऑफ द डे” व्यवस्था।