लोग उसी की अंगुली काटने का प्रयास करते, जिसे पकड़कर वो चलना सीखे-वसुंधरा

उदयपुर (डॉ. तुक्तक भानावत)। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि आज लोग उसी की अंगुली काटने का प्रयास करते हैं, जिसे पकड़कर वो चलना सीखते हैं।

राजे उदयपुर में विशिष्ट जन सम्मान समारोह में पहुंची थीं। उदयपुर के सुखाड़िया रंगमंच पर हुए कार्यक्रम में असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया भी मौजूद रहे। इस दौरान कटारिया की मंच पर एक संघ कार्यकर्ता से बहस भी हो गई और उन्होंने बुजुर्ग को मंच से धकेल दिया। बाद में कटारिया ने कार्यक्रम में कहा कि ऐसे कार्यक्रम के बीच आकर व्यवस्था नहीं बिगाड़नी चाहिए।

बुजुर्ग कार्यकर्ता पूर्व मुख्यमंत्री का सम्मान करना चाहता था, लेकिन कटारिया ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने कार्यकर्ता को जबरन मंच से उतार दिया है।

कार्यक्रम के दौरान जनसंघ से जुड़े बुजुर्ग विजय लाल सुवालका मंच पर पहुंच गए और कहने लगे कि वसुंधरा राजे को माला पहनानी है। इस दौरान उनको कार्यक्रम के चलते मंच से नीचे जाने को कहा। ट्रस्टी कुंतीलाल जैन ने उनको हटाया, लेकिन वे नहीं माने और आगे बढ़ गए। बाद में राजे के पास बैठे कटारिया कुर्सी से उठे और उन्हें हाथ से पकड़ कर आगे नीचे की तरफ ले जाने लगे। सुवालका नाराज हो गए और कहा कि धक्का क्यों दे रहे हो। बाद में पुलिस और राज्यपाल के सुरक्षाकर्मी नीचे लेकर आए।

यह कार्यक्रम जनसंघ के संस्थापक सदस्य रहे सुंदर सिंह भंडारी की पुण्यतिथि और संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया।

राजे ने बुजुर्ग संघ कार्यकर्ता से बात की :

बाद में राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया से जिस संघ कार्यकर्ता की बहस हुई थी। उससे वसुंधरा राजे ने कार्यक्रम के बाद मुलाकात की। कार्यकर्ता विजय सुवालका ने राजे को माला भी पहनाई।

बीच-बीच में सम्मान से व्यवस्था बिगड़ती है – कटारिया

जनसंघ कार्यकर्ता को धकेलने कटारिया ने कहा कि हमारे कार्यक्रम के बीच कोई विघ्न नहीं हो सकता है। अनुशासित कार्यक्रम है और बीच में आकर सब वसुंधरा जी को माला पहनाने लग जाएंगे तो व्यवस्था बिगड़ जाएगी। कार्यक्रम के बाद सब आकर माला पहनाएं कोई मनाही नहीं है।

वसुंधरा बोली — आज तो लोग उसी अंगुली को पहले काटने का प्रयास करते हैं, जिसको पकड़ कर वह चलना सीखते

राजे ने कहा कि उनकी माता विजयाराजे सिंधिया ने एमपी में 1967 में देश में पहली बार जनसंघ की सरकार बनाई और गोविंद नारायण सिंह को सीएम बनाया।

तब भंडारी जी ने पत्र लिख कर खुशी जताई थी। मां ने बचपन से ही हमें संघ के संस्कार दिए। हमारे घर में तो कई बार संघ की शाखा लगती थी। अटल जी, आडवाणी जी, राजमाता साहब, भैरों सिंह जी, सुंदर सिंह जी भंडारी, रज्जू भैया, केएस सुदर्शन जी, दत्तोपंत ठेंगड़ी जी और कुशाभाऊ ठाकरे जी जैसे देशभक्तों का मार्गदर्शन हमें मिला।

राजे ने कहा कि भंडारी जी ने राजस्थान में भैरों सिंह जी सहित कितने ही नेताओं को आगे बढ़ाया, पर वफा का वह दौर अलग था। तब लोग किसी के किए हुए को मानते थे। लेकिन, आज तो लोग उसी अंगुली को पहले काटने का प्रयास करते हैं, जिसको पकड़ कर वह चलना सीखते हैं।

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