उदयपुर। बड़गांव के पालड़ी स्थित 1200 साल पुराना वामेश्वर महादेव मंदिर धर्म, श्रद्धा और वैदिक परंपरा का संगम बनेगा। मंदिर प्रांगण में श्री पंचकुंडात्मक सहस्रचंडी एवं महारुद्र महायज्ञ का भव्य आयोजन 9 से 15 फरवरी महाशिवरात्रि तक किया जाएगा। उदयपुर शहर से लगभग 8 किलोमीटर दूर गोगुंदा रोड पर स्थित इस पावन स्थल पर आयोजित होने वाला यह महायज्ञ हरवर्ष भव्य तरीके से आयोजित होता है।
मंदिर के मुख्य पुजारी चंद्र प्रकाश नागदा ने बताया कि महायज्ञ में 125 विद्वान ब्राह्मण वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान संपन्न कराएंगे। सहस्रचंडी महायज्ञ के अंतर्गत दुर्गा सप्तशती के 1000 पाठ, दशांश हवन, तर्पण एवं मार्जन जैसे वैदिक कर्मकांड होंगे। साथ ही 1331 रुद्राभिषेक एवं हवनात्मक स्वाहाकार के माध्यम से महारुद्र का आयोजन किया जाएगा। यह संपूर्ण अनुष्ठान पंचकुंड परंपरा के अनुसार संपन्न होगा।
महायज्ञ को लेकर आसपास के गांवों एवं श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह का वातावरण है। भक्तजन तन, मन और धन से सहयोग कर इस आध्यात्मिक आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं। अनुमान है कि यज्ञ में करीब 10 लाख आहुतियां दी जाएंगी तथा प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे।
महायज्ञ की पूर्णाहुति 15 फरवरी महाशिवरात्रि को दोपहर 12:15 बजे होगी। इसके पश्चात भगवान का नगर भ्रमण और रात्रि जागरण का आयोजन होगा। 16 फरवरी को महाप्रसादी का आयोजन रखा गया है। पूरे आयोजन काल में प्रतिदिन भोजन प्रसादी एवं रात्रिकालीन भजन संध्या होगी।
विशेष रूप से 12 फरवरी को रात्रि 7 बजे से सुप्रसिद्ध भजन गायक शंभू धनगर एवं उनकी टीम द्वारा भव्य भजन संध्या प्रस्तुत की जाएगी। साथ ही आयोजन के दौरान 10 से 11 दिव्य संतों के आगमन की संभावना है, जिनके दर्शन और आशीर्वाद से श्रद्धालु स्वयं को धन्य अनुभव करेंगे।
वामेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। शिलालेखों के अनुसार मंदिर लगभग 1200 वर्ष पुराना है और इसकी स्थापना विक्रम संवत 873 में मानी जाती है। आयोजन समिति ने समस्त उदयपुरवासियों एवं धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से इस महायज्ञ में सहभागी बनकर आध्यात्मिक लाभ लेने की अपील की है।
