हिंदी को तकनीकी युग में सशक्त बनाना हमारा संकल्प है – अनिल सक्सेना ‘ललकार’”

नवाचार और अनुसंधान पर जोर देना समय की आवश्यकता है – कुलपति सारंगदेवोत
पहले दिन राजस्थान के साहित्यिक आंदोलन की श्रृंखला में परिचर्चा , पुस्तक लोकार्पण, भवाई नृत्य एवं सम्मान समारोह सम्पन्न
उदयपुर :
राजस्थान के साहित्यिक आंदोलन की श्रृंखला में राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम एवं डॉ. भंवर सुराणा स्मृति अभिनंदन समिति के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को लायंस क्लब सभागार में स्व. डॉ. भंवर सुराणा की स्मृति में एक भव्य समारोह आयोजित हुआ।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान के साहित्यिक आंदोलन के संयोजक-सूत्रधार, वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने अपने उद्बोधन में कहा- “हिंदी को तकनीकी युग में सशक्त बनाना केवल हमारा उद्देश्य नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य भी है। आज की दुनिया डिजिटल हो चुकी है, और यदि हम अपनी मातृभाषा को आधुनिक तकनीकी साधनों से जोड़ते हैं, तो हिंदी साहित्य और पत्रकारिता नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर सकती हैं। हमारा प्रयास होना चाहिए कि नई पीढ़ी न केवल हिंदी पढ़े, लिखे और समझे, बल्कि इसे डिजिटल मंचों, सोशल मीडिया, ब्लॉग और तकनीकी प्रकाशनों के माध्यम से विश्व स्तर पर फैलाए। यही हमारा साहित्यिक और सामाजिक दायित्व है। हम चाहते हैं कि हर युवा हिंदी के माध्यम से अपनी सोच, विचार और रचनात्मकता व्यक्त करे। इसी दृष्टि से हम नए प्रयोग करेंगे, नई पद्धतियाँ अपनाएँगे और हिंदी को हर क्षेत्र में प्रासंगिक बनाएंगे। यही राजस्थान का साहित्यिक आंदोलन है और यही आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी विरासत होगी।”
मुख्य अतिथि जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिव सिंह सारंगदेवोत ने कहा कि “हिंदी और मीडिया में तकनीकी प्रगति युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।” उन्होंने आगे कहा कि “हिंदी साहित्य में नवाचार और अनुसंधान पर जोर देना समय की आवश्यकता है।”


दिल्ली दूरदर्शन के पूर्व उपमहानिदेशक विशिष्ट अतिथि डॉ. के. के.रत्तू ने कहा कि “हिंदी पत्रकारिता समाज में जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।”
पूर्व आईपीएस, अभिनेता एवं संस्कृति कर्मी श्री आनंदवर्धन शुक्ल ने कहा कि “साहित्य और कला समाज में संवेदनशीलता एवं संस्कृति के संवाहक हैं।”
“मीडिया, सूचना प्रौद्योगिकी और 21वीं सदी की हिंदी” विषयक परिचर्चा में जयपुर के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. उरुक्रम शर्मा ने कहा- “हिंदी साहित्य की रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों को दिशा देती हैं।” जयपुर से आए वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार लक्ष्मण बोलियां ने कहा- “पत्रकारिता में ईमानदारी और निष्पक्षता हमेशा प्राथमिकता होनी चाहिए।” नोयडा से आए वरिष्ठ साहित्यकार आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदी की दिशा और दशा सोचनीय है। राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के प्रदेश सचिव गिरीश पालीवाल और सदस्य अम्बालाल साहू ने व्यवस्थाओं को संभाला।
दो पुस्तकों का लोकार्पण और भवाई नृत्य :
इस अवसर पर डॉ. शकुन्तला सरूपरिया की दो पुस्तकों ‘रूह के परिंदे’ और ‘मधुमास लाउंगी मैं’ का लोकार्पण हुआ। समीक्षाएँ डॉ. वंदना मिश्र, डॉ. अवधेश जौहरी, श्रीमती पूनम और डॉ. श्रीनिवासन अय्यर ने प्रस्तुत कीं। एस.के. इवेंट कंपनी द्वारा प्रस्तुत भवाई लोकनृत्य ने कार्यक्रम को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक रंग प्रदान किया।
10 कलमकारों को मिला सृजन विभूति सम्मान :
स्व. डॉ. भंवर सुराणा स्मृति अभिनंदन समारोह में अनिल सहगल (मुंबई), आनंदवर्धन शुक्ल (जयपुर), आईएएस डॉ. टीकम बोहरा ‘अनजाना’, अरविंद मिश्र (भोपाल), डॉ. वंदना मिश्र (भोपाल), सत्यनारायण जोशी (चित्तौड़गढ़), आलोक श्रीवास्तव ‘अविरल’ (नोएडा), डॉ. प्रकाश उपाध्याय (जावरा), श्रीमती कृष्णा नगारची (उदयपुर) और डॉ. योगेश सिंघल (उदयपुर) को सृजन विभूति सम्मान से सम्मानित किया गया।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना और शिक्षाविद मोनिका गोड़ के द्वारा स्व. डॉ. भंवर सुराणा के जीवन-परिचय से हुआ। डॉ. भंवर सुराणा स्मृति अभिनंदन समिति के अध्यक्ष श्री भगत सिंह सुराणा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन उदयपुर कार्यक्रम संयोजक डॉ. शकुन्तला सरूपरिया ने किया। कार्यक्रम में देश के कई शहरों सहित उदयपुर के कलमकार और कलाकार मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और लोकसभा याचिका समिति के सभापति ने दी शुभकामनाएं :
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा , उपमुख्यमंत्री श्रीमती दिया कुमारी और लोकसभा की याचिका समिति के सभापति सी.पी.जोशी ने राजस्थान के साहित्यिक आदोंलन के अंतर्गत दो दिवसीय कार्यक्रम की शुभकामना प्रेषित की।

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