जॉन हॉपकिंस-सीसीपी ने बर्नार्ड वान लीयर फाउंडेशन के सहयोग से उदयपुर में सामाजिक एवं व्यवहारगत बदलावों के लिए प्रशिक्षण दिया

उदयपुर। उदयपुर नगर निगम (यूएमसी) और अधिकारियों को छोटे बच्चों और उनके परिवारों की नजर से सोशल एवं बिहेवियर चेंज (एसबीसी) के पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यशाला श्रृंखला की अभिकल्पना जॉन हॉपकिंस-सेंटर फॉर कम्युनिकेशन प्रोग्राम्स द्वारा की गई थी। इस आयोजन को बर्नार्ड वान लीयर फाउंडेशन का सहयोग मिला जो आरंभिक बचपन विकास की दिशा में कार्यरत एक स्वतन्त्र फाउंडेशन है। इस पहल का लक्ष्य अधिकारियों को ग्लोबल अर्बन95 पहल के अंतर्गत 0 से 5 वर्ष तक की आयु के बच्चों की नजर से परियोजनाओं और कार्यक्रमों की अभिकल्पना करना, नियोजन और प्रबंधन में व्यवहारगत बदलाव सम्मिलित करने में सहयोग करना था।
क्षमता सुदृढ़ीकरण कार्यशाला को 3 घंटे के साप्ताहिक सत्रों के साथ चार सप्ताहों तक वर्चुअल विधि से संचालित किया गया। सहभागियों को अर्बन95 प्रोग्राम से परिचित कराया गया। यह प्रोग्राम उदयपुर नगर निगम और नीदरलैंड स्थित बर्नार्ड वान लीयर फाउंडेशन के बीच एक बहुस्तरीय पहल है। यह शहर नियोजन और डिजाईन में छोटे बच्चों और उनके परिवारों के दृष्टिकोण को शामिल करने पर केन्द्रित है। इसके बाद प्रासंगिक एसबीसी संकल्पनाओं – मानव केन्द्रित डिजाईन, जेंडर और एसबीसी तथा संरक्षण एवं मूल्यांकन विधिया एवं साधनों पर चार गंभीर सत्र हुए। इन सत्रों से सहभागियों की एसबीसी के बारे में समझ मजबूत होगी और वे बुनियादी बातों से एक कदम आगे बढ़ जायेंगे। साथ ही उन्हें अपने-अपने कार्यक्षेत्र में प्रयोग करने के लिए आवश्यक टूल्से मुहैया किये जायेंगे।
कार्यशाला के सत्र संवादात्मक एवं आकर्षक थे, जहाँ सहभागियों ने व्यवहारगत चुनौतियों तथा उनके अपने-अपने शहर स्तकर पर मध्यवर्तनों पर फोकस किया, अपने-अपने अनुभव साझा किये और कोर्स डायरेक्टर और अन्य सहभागियों से सीखा।
उदयपुर नगर निगम तथा उदयपुर स्मार्ट सिटी लि. के एक्जीनक्यूटिव इंजीनियर महेंद्र समदानी ने कहा कि हमारे लिए यह वर्कशॉप काफी लाभदायक थी। तकनीकी कामों को लागू करने से पहले वहां के समुदाय के बिहेवियर को समझना, उसका मूल्यांकन करना और मूल्यांकन के तरीके समझना; इस पूरी प्रक्रिया में डीप-डाईव करना बहुत मज़ेदार था। मुझे लगता है कि इससे किसी सिविल या टेक्नीकल प्रोजेक्ट को करने से पहले स्थानीय समुदाय को साथ लाने में काफी सहायता मिलेगी। इससे समुदाय, खासकर छोटे बच्चों के केयर-गिवर्स उन प्रोजेक्ट्स का पूरा लाभ ले पायेंगे। नगर निगम और स्मार्ट-सिटी के विभिन्न प्रोजेक्ट्स को करते समय हम इन प्रक्रियाओं का पूरी तरह से उपयोग कर पायेंगे। अर्बन95 टीम को धन्यवाद, जिन्होंने हमें इस वर्कशॉप का हिस्सा बनाया। आनेवाले दिनों में भी हम इस प्रकार की वर्कशॉप में ज़रूर जुडऩा चाहेंगे।
जॉन्स हॉपकिंस सेंटर फॉर कम्युनिकेशन प्रोग्राम (सीसीपी) में सीनियर सोशल एवं बिहेवियर चेंज और कैपेसिटी स्ट्रे्न्थमनिंग एडवायजर, उत्तरा भारत कुमार ने कहा कि एसबीसी एक अनुशासन है जिसमें साक्ष्य-सूचित मध्यवर्तनों का निर्माण करने के लिए मानव एवं सामाजिक बिहेवियर की गहरी समझ का प्रयोग किया जाता है। ये मध्यवर्तन व्यक्तिगत व्यवहारों और उनके अन्तर्निहित सामाजिक नियमों पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
बर्नार्ड वान लीयर फाउंडेशन की भारत प्रतिनिधि रुश्दा मजीद ने कहा कि हमें बहुत प्रसन्नता है कि शहर के अधिकारियों ने अर्बन95 उदयपुर के अंतर्गत अपने कार्यों में बिहेवियर चेंज का सिद्धांत लागू करने के लिए तकनीकी पाठ्यक्रम में हिस्सा लिया है। हमें उम्मीद है कि छोटे बच्चों और उनकी देखभाल करने वालों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से इस प्रकार के शिक्षण अनुभवों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर उन अनुभवों के प्रयोग के माध्यम से शहर के साथ हमारी साझेदारी लगातार मजबूत होगी।

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