पिम्स हॉस्पिटल में कॉर्डियोलॉजिस्ट की मदद से बिना ओपन हार्ट सर्जरी के ह्रदय का छेद बंद किया

उदयपुर। पेसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, पिम्स हॉस्पिटल, उमरड़ा में चिकित्सकों ने कॉर्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में बिना ओपन हार्ट सर्जरी के ह्रदय का छेद बंद कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
पिम्स के चैयरमेन आशीष अग्रवाल ने बताया कि पिम्स हॉस्पिटल में चिकित्सकों ने एक बच्चे के बिना चीरफाड़ कि ह्रदय का छेद बंद किया है। बच्चे का इलाज चिरंजीवी योजना के तहत निशुल्क किया गया। सीनियर कंसलटेंट एंड इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. महेश जैन और उनकी टीम ने ह्रदय में जन्मजात छेद (एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट) को बंद करने के लिये एएसडी डिवाइस क्लोजर सर्जरी की। श्री आशीष अग्रवाल ने बताया कि सामान्यत: जन्म के कुछ महीने के बाद ह्रदय की दो चैम्बर्स के बीच मार्ग स्वत: बंद हो जाता है लेकिन किसी-किसी केस में ऐसा नहीं होता और वह मार्ग खुला रह जाता है। इसे सामान्य भाषा में दिल में छेद होना तथा मेडिकल भाषा में एएसडी यानी एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट कहा जाता है।
सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. महेश जैन ने बताया कि इस विकार से ग्रस्त लोगों को तेज चलने, सीढ़ी चढऩे के दौरान सांस फूलने, चक्कर आने, कमजोरी महसूस होने की समस्या होती है तथा इनका शारीरिक विकास सामान्य लोगों की अपेक्षा कम होता है। एएसडी में डिवाइस क्लोजर तकनीक से दिल के छेद को बंद किया जाता है। एएसडी डिवाइस क्लोजर एक छतरीनुमा डिवाइस होता है जिसमें दो छतरियां तथा बीच में एक नलिकानुमा हिस्सा होता है। इसे एक नली के रूप में ह्रदय के छेद तक पहुंचाया जाता है। सर्जरी और बाकी प्रक्रिया कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. महेश जैन ने की। इसमें कॉर्डिक एनेथेस्टिक डॉ. विपिन सिसोदिया, सीटीवीएस सर्जन डॉ. विवेक रावत ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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