नव वर्ष 2025 को आत्मबोध से परिपूर्ण करने वाला हुआ ऐतिहासिक आयोजन
उदयपुर। श्री कुन्दकुन्द कहान वीतराग विज्ञान शिक्षण समिति, उदयपुर के तत्वावधान में हुमड़ भवन, गायरियावास में आयोजित चार दिवसीय आध्यात्मिक शिक्षण शिविर एवं 170 तीर्थंकर मंडल विधान का समापन दिवस अत्यंत श्रद्धा, गरिमा एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह शिविर वर्ष 2025 के समापन से पूर्व आयोजित एक ऐसा विशिष्ट आध्यात्मिक आयोजन सिद्ध हुआ, जिसने समाज को आत्मबोध, संयम, वीतराग दृष्टि तथा जिनवाणी के गूढ़ तत्वों से जोडऩे का महत्वपूर्ण कार्य किया। चार दिनों तक चले इस शिविर में प्रात:कालीन विधान, प्रवचन, बच्चों की कक्षाएँ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ तथा आत्मचिन्तन से जुड़े विविध कार्यक्रमों के माध्यम से श्रावक-श्राविकाओं, युवाओं एवं बालकों को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करने का सार्थक प्रयास किया गया।

अध्यक्षता आशा पंड्या ने की, जबकि मुख्य अतिथि सुरेंद्र गंगावत रहे। विशिष्ट अतिथि डॉ. उदयचंद जैन, ललित किकावत, शांतिलाल अखावत, मुकेश मेहता, नरेंद्र दलावत, नरेश जैन एवं विनोद जैन रहे । अतिथियों ने शिविर की उपयोगिता की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को समाज के नैतिक एवं आध्यात्मिक उत्थान के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
कार्यक्रम का मंगलाचरण आत्मार्थी देशना बण्डी द्वारा किया गया, जिससे सभागृह भक्ति, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा। अतिथियों का स्वागत राजमल गोदड़ोत, नृपेन्द्र जैन, राकेश दलावत, निर्मल अखावत, राकेश दोशी एवं भरत सांगावत द्वारा किया गया। स्वागत उद्बोधन समिति के महामंत्री राजमल गोदड़ोत ने प्रस्तुत करते हुए शिविर की पृष्ठभूमि, उद्देश्य एवं आयोजन की भावना से उपस्थित जनसमूह को अवगत कराया और कहा कि इस प्रकार के शिविर समाज में आत्मचिन्तन, सही दृष्टि एवं जिनवाणी के प्रति गहन रुचि जाग्रत करने का सशक्त माध्यम हैं। पं. ऋषभ शास्त्री ने शिविर की चार दिवसीय उपलब्धियों पर सारगर्भित उद्बोधन दिया और बताया कि शिविर के माध्यम से आत्मा के शुद्ध स्वरूप, बंधन-मोक्ष की प्रक्रिया तथा वीतराग जीवन-दृष्टि को सरल एवं व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे समाज में आध्यात्मिक चेतना का विस्तार हुआ।
चारों दिन बाहर से पधारे विद्वान पं. धनसिंह ज्ञायक एवं पं. रमेश शास्त्री का शॉल, उपरणा एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मान किया गया। समिति की ओर से कहा गया कि इन विद्वानों ने चारों दिन आगम, अध्यात्म और जिनवाणी का मर्म अत्यंत सरल, सहज एवं प्रभावी शैली में प्रस्तुत कर समाज को लाभान्वित किया। उदयपुर के स्थानीय विद्वानों डॉ. महावीर शास्त्री, पं. ऋषभ शास्त्री, पं. खेमचंद जैनदर्शनाचार्य, डॉ. जिनेंद्र शास्त्री, पं. संदीप मेहता, डॉ. अंकित शास्त्री, डॉ. तपिश शास्त्री, पं. गजेंद्र शास्त्री, पं. अर्पित शास्त्री, पं. राहुल शास्त्री, पं. प्रशांत शास्त्री, डॉ. निलेश शास्त्री, पं. हितंकर शास्त्री एवं पं. भव्य शास्त्री का भी सम्मान कर समाज की ओर से कृतज्ञता व्यक्त की गई।
शिविर के अंतर्गत आयोजित ड्राइंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान अतिशय जैन, द्वितीय खुश जैन एवं तृतीय स्वेच्छा जैन ने प्राप्त किया, जिन्हें पुरस्कार प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया। इस अवसर पर श्री शांतिनाथ दिगंबर मुमुक्षु जैन मंदिर, नेमीनाथ कॉलोनी में प्रस्तावित नवीन भवन के 3-ष्ठ मॉडल का भी प्रस्तुतीकरण किया गया, जिसकी संपूर्ण रूपरेखा एवं भावी स्वरूप की जानकारी डॉ. महावीर शास्त्री द्वारा विस्तारपूर्वक दी गई।
समापन अवसर पर राजमल एवं लोकेश गोदड़ोत के कर-कमलों द्वारा शोभायात्रा के माध्यम से श्रीजी का विहार कराते हुए उन्हें श्री 1008 चन्द्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, आदर्श नगर, गाय्रयावास में पुन: विराजमान किया गया। इस शोभायात्रा में संपूर्ण मुमुक्षु समाज ने सहभागिता निभाई और अत्यंत हर्षोल्लास के साथ कार्यक्रम की पूर्णता हुई। समिति के अध्यक्ष अभय बण्डी ने अतिथियों, विद्वानों, सहयोगियों एवं समाजजन का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। समिति ने कहा कि वर्ष 2025 के समापन के साथ आयोजित यह शिविर नववर्ष के मंगलारंभ से पूर्व आत्मशुद्धि, आत्मबोध एवं संस्कारों का एक पावन सोपान सिद्ध हुआ है, जो समाज को दीर्घकाल तक प्रेरणा प्रदान करता रहेगा।
