उदयपुर सौर वेधशाला के स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन का शुभारंभ

उदयपुर  | अंतरिक्ष मौसम अब एक गंभीर चुनौती बन चुका है, जो न सिर्फ पृथ्वी को प्रभावित करता है, बल्कि अंतरिक्ष में तैनात वेधशालाओं और उपग्रहों पर भी गहरा असर डालता है। सूर्य की गतिविधियों पर पैनी नजर रखकर अब पृथ्वी और अंतरिक्ष दोनों को संभावित खतरों से पहले ही अलर्ट किया जा सकेगा। आने वाले समय में ‘अंतरिक्ष मौसम (Space Weather)’ भारत के लिए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक क्षेत्र बनने जा रहा है, जिससे उपग्रहों, अंतरिक्ष मिशनों और पृथ्वी की संचार प्रणालियों की सुरक्षा संभव हो सकेगी। यह बात आज इसरो के पूर्व चेयरमैन, पद्म श्री डॉ. ए.एस. किरण कुमार ने उदयपुर सौर वेधशाला के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में उदयपुर में ‘एक्सप्लोरिंग द सन एट हाई-रिजोल्यूशन: प्रेजेंट पर्सपेक्टिव्स एंड फ्यूचर होराइजन्स’ थीम पर 10 से 13 फरवरी 2026 तक आयोजित किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान कही।


उन्होंने कहा कि मानव सभ्यता सदियों से सूर्य का अध्ययन कर रही है। आज के वैज्ञानिक युग में हमारे पास शक्तिशाली कंप्यूटिंग सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी तकनीकें हैं, जिससे सूर्य के डेटा को ‘अर्ली वॉर्निंग सिस्टम’ में बदलकर मानवता को बड़े खतरों से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सूर्य की गतिविधियां सीधे पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र, सैटेलाइट सिस्टम, जीपीएस, मोबाइल नेटवर्क और अंतरिक्ष यानों को प्रभावित करती हैं। इसलिए, स्पेस वेदर की सटीक भविष्यवाणी आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने इसरो के आदित्य-एल1 मिशन को भारत की ऐतिहासिक जीत बताते हुए कहा कि इस मिशन से पहली बार सूर्य के फोटोस्फीयर का अद्धीयन बेहद करीब से संभव हुआ जिससे वैज्ञानिकों को सूर्य की सतह और ऊर्जा उत्सर्जन को गहराई से समझने का मौका मिला और आने वाले सालों में यह डेटा अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी के लिए एक मजबूत आधार बनेगा।
इस अवसर पर निवृत्ति कुमारी मेवाड़ ने मेवाड़ की पावन धरा पर वैज्ञानिक समुदाय का स्वागत किया और अंतरिक्ष विज्ञान में वैज्ञानिकों के समर्पण की सराहना की । उन्होंने आश्वस्त किया कि महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन भविष्य में भी ऐसे वैज्ञानिक कार्यक्रमों के लिए पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा । प्रारंभ में प्रो. अनिल भारद्वाज ने सभी अतिथियों और वैज्ञानिकों का स्वागत किया । उन्होंने उदयपुर सौर वेधशाला के वैज्ञानिक योगदानों पर प्रकाश डाला और PRL की स्थापना में प्रो. विक्रम साराभाई, प्रो. यू. आर. राव एवं प्रो. के. कस्तूरीरंगन के ऐतिहासिक संबंधों की चर्चा की । 
उद्घाटन सत्र के दौरान प्रो. भुवन जोशी (USO-PRL) ने एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से उदयपुर सौर वेधशाला की स्थापना से लेकर अब तक के 50 वर्षों के स्वर्णिम सफर को साझा किया । प्रो. शिबू के मैथ्यू (USO-PRL) ने आगामी चार दिनों तक चलने वाले विभिन्न तकनीकी सत्रों की रूपरेखा प्रस्तुत की । उन्होंने बताया कि उदयपुर सौर वेधशाला सौर भौतिकी में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थान बन चुकी है। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में विशेषज्ञ उन्नत दूरबीनों और मिशनों से मिले सौर वायुमंडलीय घटनाओं के निष्कर्ष साझा करेंगे। उन्होंने कहा कि यह साल दोहरी खुशी का है, क्योंकि यह भारत की सबसे उन्नत सौर अवलोकन सुविधा ‘मास्ट’ (MAST) की 10वीं वर्षगांठ भी है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. रोहन यूजीन लुइस (USO-PRL) ने मंच संचालन करते हुए सभी अतिथियों और उपस्थित विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया । सम्मेलन में भारत और विदेशों से करीब 100 प्रतिष्ठित सौर भौतिकविद भाग ले रहे हैं।

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