सत्य, निर्भयता और जनसेवा गांधी की पत्रकारिता के मूल आधार : प्रो. विनोद कुमार पांडेय

कम्युनिकेशन टुडे की वेबिनार श्रृंखला के छह वर्ष पूर्ण, 238वें राष्ट्रीय वेबिनार में गांधी की पत्रकारिता पर विमर्श

जयपुर। गांधी की पत्रकारिता सत्य, अहिंसा, निर्भयता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्ध थी। उन्होंने समाचार पत्रों को सामाजिक परिवर्तन, लोकशिक्षण और स्वतंत्रता संघर्ष का प्रभावी माध्यम बनाया। यह विचार गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार पांडेय ने गांधी जयंती पर आयोजित 238वें राष्ट्रीय वेबिनार में व्यक्त किए।

जयपुर से प्रकाशित मीडिया त्रैमासिक ‘कम्युनिकेशन टुडे’ तथा भारती विद्यापीठ इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशंस एंड मैनेजमेंट, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वेबिनार का विषय ‘निर्भय सत्य : गांधी की पत्रकारिता दृष्टि’ था। इस अवसर पर वेबिनार श्रृंखला के छह वर्ष पूर्ण होने का उत्सव भी मनाया गया।

प्रो. विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि गांधी के लिए पत्रकारिता का उद्देश्य समाज की सेवा और जनचेतना का विकास करना था। ‘इंडियन ओपिनियन’, ‘यंग इंडिया’, ‘नवजीवन’ और ‘हरिजन’ के माध्यम से उन्होंने अन्याय, रंगभेद और अस्पृश्यता के विरुद्ध आवाज उठाई। उनकी पत्रकारिता में वंचितों की पीड़ा और सामाजिक समानता के प्रश्नों को प्रमुख स्थान मिला।

उन्होंने कहा कि गांधी शब्दों का चयन सावधानी और संयम से करते थे। क्रोध, दुर्भावना और अतिशयोक्ति से बचना उनकी लेखन शैली की विशेषता थी। पत्रकार का आत्मसंयम और नैतिक विवेक उनके लिए महत्वपूर्ण था। भारतीय भाषाओं में प्रकाशन के माध्यम से उन्होंने व्यापक जनसमुदाय तक अपने विचार पहुँचाए।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए कम्युनिकेशन टुडे के संपादक एवं राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र के पूर्व अध्यक्ष प्रो. संजीव भानावत ने कहा कि पत्रकार की पहली निष्ठा सत्य के प्रति होनी चाहिए। निर्भय पत्रकारिता के लिए तथ्यों की जाँच, अभिव्यक्ति का साहस और सामाजिक संवेदनशीलता आवश्यक हैं। डिजिटल माध्यमों में सूचनाओं के तीव्र प्रसार को देखते हुए स्रोत एवं संदर्भ की जाँच का महत्व बढ़ गया है।

चर्चा में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के डॉ. बाला लखेंद्र, शिमला के पत्रकार सौरभ चौहान, शीला देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, फरीदाबाद के निदेशक डॉ. संजय कुमार सदाना तथा पटौदा, झज्जर, हरियाणा से डॉ. दयानंद कादियान ने भाग लिया। चर्चा में पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों, संस्थागत दबावों और गांधी के विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर विमर्श हुआ।

वेबिनार संयोजक एवं भारती विद्यापीठ की सहायक प्रोफेसर प्रियंका सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की तथा धन्यवाद ज्ञापित किया। मुख्य वक्ता का ई-बुके एवं ई-स्मृति-चिह्न से अभिनंदन किया गया।

कार्यक्रम के सफल संचालन में भारती विद्यापीठ के जयंत राठी, पुष्पेंद्र सिंह, अंबुश तथा डॉ. पृथ्वी सेंगर (आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ) का महत्वपूर्ण योगदान रहा।