इंटरनेशनल जि़ंक एसोसिएशन और हिंदुस्तान जिंक लि. ने महाराणा प्रताप युनिवर्सिटी के साथ मिलकर फसलों में जि़ंक के उपयोग पर किसान बैठक एवं प्रशिक्षण प्रोग्राम आयोजित किया

उदयपुर। किसानों को खेती में जि़ंक के संतुलित इस्तेमाल के बारे में जागरुक बनाने के लिए हाल ही में इंटरनेशनल जि़ंक एसोसिएशन और हिंदुस्तान जि़ंक लि. ने महाराणा प्रताप युनिवर्सिटी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौता ज्ञापन के तहत महाराणा प्रताप युनिवर्सिटी में पहले प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें मदार गांव के 30 किसानों ने हिस्सा लिया। सत्र में बड़ी संख्या में महिला किसान शामिल हुईं। सत्र के दौरान खेती में सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे जि़ंक के महत्व पर रोशनी डाली गई। सत्र में हिस्सा लेने वाले मुख्य उपस्थितगणों में डॉ. एस के शर्मा, डायरेक्टर रीसर्च, एमपीयूएटी, डॉ. सौमित्रा दास, डायरेक्टर, साउथ एशिया- ज़ैडएनआई, इंटरनेशनल जि़ंक एसोसिएशन, डॉ. रेखा व्यास, ज़ोनल डायरेक्टर रीसर्च, एमपीयूएटी, डॉ. अरविंद वर्मा, एसोसिएट डायरेटर रीसर्च, एमपीयूएटी, डॉ. देवेन्द्र जैन, असिस्टेन्ट प्रोफेसर तथा डॉ. गजानन्द जाट, असिस्टेन्ट प्रोफेसर और प्रोजेक्ट के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर शामिल थे। प्रवक्ताओं ने खाद्य श्रृंखला में जि़ंक के महत्व और मानव के स्वास्थ्य पर जि़ंक की भूमिका पर रोशनी डाली।
डॉ. एस के शर्मा ने कहा कि जि़ंक पौधों और मनुष्य के पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। देशभर में 36.5 फीसदी मिट्टी में जि़ंक की कमी पाई गई है और राजस्थान में तो यह कमी 50 फीसदी से भी अधिक है। जिक़ एक ऐसा पोषक तत्व है जो न सिर्फ मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है बल्कि यह फसलों के जीवन और गुणवत्ता में भी सुधार लाता है। किसानों को इस विषय पर जागरुक बनाने के लिए मोबाइल ऐप भी विकसित किए गए हैं। किसानों के लिए बेस्ट जि़ंक मैन फैलो और जि़ंक वुमेन फैलो पुरस्कार भी शुरू करेंगे। ये पुरस्कार उन किसानों को दिए जाएंगे जो फसलों, पशुओं एवं मानव स्वास्थ्य में जि़ंक के ऐप्लीकेशन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
डॉ. सौमित्रा दास ने कहा कि देश की तकरीबन 40 फीसदी मिट्टी में जि़ंक की कमी है, जिसका बुरा असर फसलों की गुणवत्ता और मनुष्य के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। दुनिया भर में तकरीबन 50 फीसदी मिट्टी में जि़ंक की कमी है, परिणामस्वरूप 2 बिलियन से अधिक लोग जि़ंक की कमी का शिकार हैं। इसके चलते एशियाई एवं अफ्रीकी देशों के छोटे बच्चों में डायरिया और निमोनिया जैसी बीमारियां आम हैं। महामारी के दौरान जि़ंक को कोविड-19 जैसे खतरनाक वायरस से लडऩे के लिए महत्वपूर्ण अवयव माना गया। इस तरह के सम्मेलनों के माध्यम से हम किसानों के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं और उन्हें फसलों एवं पोषण में जि़ंक के महत्व पर शिक्षित करना चाहते हैं।

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