ऐतिहासिक उदयपुर सेवा का भी पर्यायः डॉ. वीरेंद्र कुमार 

नारायण सेवा संस्थान में 501 दिव्यांगजन निःशुल्क शल्य चिकित्सा शिविर का उद्घाटन

उदयपुर । उदयपुर दुनिया में एक ऐतिहासिक शहर के रूप में पहचान तो रखता ही है, यह सेवा का भी पर्याय हैं। दीन -दुखियों ओर वंचितों की सेवा ईश्वर की ही पूजा है। यह बात केंद्रीय सामाजिक न्याय एंव अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने नारायण सेवा संस्थान के सेवामहतीर्थ परिसर में 501 दिव्यांगजन के निःशुल्क ऑपरेशन एंव सहायक उपकरण वितरण शिविर के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कही । उन्होंने कहा कि दिव्यांगों की सेवा, चिकित्सा, पुनर्वास व रोजगार के क्षेत्र में राज्य व केंद्र सरकारे तो काम कर रही हैं लेकिन जब सामाजिक संस्थाएं और व्यक्ति समूह आगे बढ़ते हैं तो सरकार के प्रयास और अधिक सार्थक हो जाते हैं। इस विषय मे उन्होंने केंद्र की अनेक योजनाओं का भी जिक्र किया । उन्होंने कहा कि एक -एक मिट्टी आटा संग्रहण से रोगियों की भोजन सेवा से शुरू हुई नारायण सेवा संस्थान आज दिव्यांगों के विश्वास व सम्बल का प्रतीक बन गया है। उन्होंने केंद्रीय योजनाओं के तहत संस्थान को हर सम्भव सहयोग की घोषणा की।

 इससे पूर्व संस्थापक पद्मश्री कैलाश मानव ने डॉ. वीरेंद्र का साफा, शॉल, दुप्पटा ओर अभिनन्दन पत्र भेंट कर स्वागत किया । उन्हें मेवाड़ के शौर्य के प्रतीक चेतक पर सवार महाराणा प्रताप की प्रतिमा भी भेंट की गई । अध्यक्ष प्रशान्त अग्रवाल ने संस्थान की 37 वर्षीय सेवायात्रा का जिक्र करते हुए कहां कि संस्थान अब तक 4 लाख 31 हजार से अधिक ऑपरेशन के साथ ही हजारों दिव्यांगों को सहायक उपकरण, कृत्रिम अंग और कैलिपर भी लगा चुका है। पुनर्वास प्रकल्प में 2201 निर्धन एवं दिव्यांग जोड़ों की गृहस्थी बसाई गई हैं। आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में अनेक रोजगारपरक प्रशिक्षण भी चलाए जा रहे हैं। मंत्री महोदय ने देश के विभिन्न प्रान्तों से सर्जरी के लिए आए दिव्यांग एंव उनके परिजनों से भी मुलाकात की । 

समारोह में श्रीमती कमल वीरेंद्र का निदेशक वंदना अग्रवाल ने शॉल एंव गुलदस्ता देकर अभिनन्दन किया । इस अवसर पर सामाजिक न्याय एंव अधिकारिता विभाग उपनिदेशक मानधाता सिंह , अम्बेडकर सोसायटी के अध्यक्ष शैलेन्द्र चौहान, किशन खटीक, चितौड़ के समाजसेवी कन्हैयालाल, धनश्याम खटीक, बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। आभार ट्रस्टी एंव निदेशक देवेन्द्र चोैबीसा व संचालन महिम जैन ने किया।

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