पेयजल सरंक्षण के लिये जिंक द्वारा अपने परिचालन में उपचारित जल का उपयोग पहली प्राथमिकता

उदयपुर। जल, जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। जल संरक्षण को न केवल वर्तमान समय की आवश्यकता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में दीर्घस्थायी दृष्टिकोण के रूप में महत्वपूर्ण है। खनन उद्योग में अग्रणी हिन्दुस्तान जिंक़ को थर्ड पार्टी आर्गेनाइजेशन द्वारा किए गए मूल्यांकन के आधार पर वाटर पॉजिटिव कंपनी घोषित किया गया है। हिंदुस्तान जिंक़ अपने परिचालन में कंपनी जल सरंक्षण हेतु कटिबद्ध है। जिंक द्वारा जल स्रोत पर पानी की कमी, रिसाइक्लिंग, पानी के वैकल्पिक स्रोतों की खोज और विभिन्न संरचनाओं के माध्यम से पानी की पूर्ति के लिए जोर दिया गया है। जिंक ने पानी के स्थायित्व के लिए लगातार प्रयास किए हैं। कंपनी के पास स्टेट एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स और रिसाइकलिंग सुविधाएं, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, जल दक्षता में वृद्धि और वर्षा जल संचयन संरचनाएँ हैं जिसने जल-प्रबन्ध अभियान एवं प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कंपनी सरकार के साथ मिलकर कई जल स्रोतों का रखरखाव करती है। पीपीपी मॉडल के तहत जिंक की ऐसी ही एक प्रमुख परियोजना 2014 में 20 एमएलडी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण है। औसतन, उदयपुर शहर प्रति दिन लगभग 70 मिलियन लीटर सीवेज उत्पन्न करता है जो कि झीलों के पानी में मिलकर उसे दूषित कर रहा था। उदयपुर में स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट न केवल स्थानीय झीलों में सीवेज के प्रवाह को कम करता है बल्कि कंपनी के संचालन के लिए एक स्थायी जल स्रोत भी प्रदान करता है।
2014 में पहले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की सफलता के बाद, जिंक ने 60 एमएलडी की क्षमता का विस्तार करते हुए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स नेटवर्क स्थापित किया है। संचालन के लिए शुद्ध जल के स्थान पर एसटीपी-उपचारित पानी के उपयोग से आस-पास के समुदायों के लिए पेयजल की उपलब्धता में वृद्धि हुई है। सीवेज के उपचार की प्रक्रिया पर्यावरण के अनुकूल है क्योंकि प्रक्रिया के दौरान कोई हानिकारक उत्सर्जन उत्पन्न नहीं होता है और पूरी तरह से स्वचालित संयंत्र और हाइड्रोलिक तंत्र के कारण प्रक्रिया के दौरान बिजली की खपत भी कम होती है।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरूण मिश्रा ने बताया कि जल संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है और हम जो कुछ भी करते हैं उसमें जीवन का एक तरीका होना चाहिए। जिंक पहले से ही 2.41 गुना वाटर पॉजिटिव कंपनी हैं और हम जल प्रबंधन के लिए एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण रखते है जिसका उद्देश्य हमारे प्रदर्शन, दक्षता, पुनर्नवीनीकरण पानी के बढ़ते उपयोग में सुधार करना है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे है हम वर्ष 2025 तक 5 गुना वाटर पॉजिटीव बनने और शुद्ध जल की खपत को 25 प्रतिशत तक कम करने और पीपल, प्लेनेट और प्रोसपेरिटी पर सकारात्मक और दीर्घकालिक प्रभाव देने वाली परिवर्तनकारी पहल में निवेश करने के हमारे सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जिंक जल संरक्षण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को सुनिश्चित करने हेतु विभिन्न जल संरक्षण पहल को अपनाने, तलाशने और कार्यान्वित करने के लिये सतत् प्रयत्नशील है। कंपनी के पास अत्याधुनिक अपशिष्ट उपचार संयंत्र और पुनर्चक्रण सुविधाएं, ड्राई टेलिंग संयंत्र और वर्षा जल संचयन संरचनाएं हैं जिन्होंने इस जल प्रबंधन अभियान की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
हिंदुस्तान जिंक राजस्थान के सुदूर गांवों में सुरक्षित और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करता है। कंपनी ने मॉडल प्रोजेक्ट के तहत आरओ प्लांट स्थापित किये हैं, जिनसे शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। कंपनी द्वारा कुछ स्थानों पर वाटर एटीएम से ग्रामीणों को उचित दाम पर शुद्ध पानी मिलता है। कंपनी द्वारा कुछ स्थानों पर स्वच्छ जल स्रोत उपलब्ध नहीं होने पर पानी के टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जाती है। सभी को स्वच्छ पानी और स्वच्छता प्रदान करने के लिए जिंक के जल प्रबंधन लक्ष्यों को ‘यू एन सस्टेनेबल गोल 6’ से जोड़ा गया है। ये संयुक्त राष्ट्र ग्लोबल कॉम्पैक्ट वाटर एक्शन प्लेटफॉर्म (सीईओ वाटर मैंडेट) के लिए भी प्रतिबद्ध हैं, जो जल प्रबंधन के लिए इसके छह मुख्य तत्वों को अपनाने और लागू करने की जिम्मेदारी है।

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