बच्चों, वृद्धों, गर्भवती महिलाओं और मांसाहारियों को है कोरोनो वायरस से ज्यादा खतरा : डॉ. संदीप भटनागर

एन्टिऑक्सिडेन्ट युक्त आहार लेकर बच सकते है कोरोनो वायरस से
परस जे. के. हॉस्पिटल में कोरोना वायरस पर अवेयरनेस कार्यक्रम

उदयपुर। कोरोनो वायरस एक प्रकार का सर्दी जुखाम से संबंधित व्यापक वायरस है जो जानवरों व इंसानों दोनों में पाया जाता है। इसमें सर्दी जुकाम से लेकर गंभीर फेफड़ा रोग भी हो सकता है। इस वायरस में 8 से 10 प्रतिशत मामालों में फेफड़ों व श्वांस के गंभीर रोगों के साथ निमोनिया होकर मरीज की जान भी जा सकती है। यह जानकारी पारस जे. के. हॉस्पिटल में सीनियर कंसलटेंट इन्टरनल मेडिसिन डॉ. संदीप भटनागर ने कोरोना वायरस पर अवेयरनेस कार्यक्रम में दी।
डॉ. भटनागर ने बताया कि इस बीमारी के शुरुआती दौर में सामान्य सर्दी खांसी जुखाम जैसे ही लक्षण दिखाई पड़ते हैं जिस कारण इसको शुरुआत में पहचानना मुश्किल हो जाता है। लंबे समय तक सर्दी खांसी जुखाम, बुखार व अन्य बीमारियां होने पर आदमी तुरंत ही नजदीकी चिकित्सक से संपर्क करें तो बीमारी को बढऩे से रोका जा सकता है।
डॉ. भटनागर ने बताया कि यह एक संक्रमण जनित रोग है और यह हवा द्वारा, छूने, एक दूसरे के कपड़े व अन्य सामान प्रयोग करने से एक से दूसरे में फैलता है। पालतु जानवरों जैसे बिल्ली, कुत्ता आदि से भी फैलता है। यह संक्रमित मॉल से भी फैलता है। इससे बचने के लिए एन्टिऑक्सिडेन्ट से युक्त आहार लेना चाहिये। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहना, बार-बार हाथ धोना, टीश्यू पेपर, रुमाल को सही से प्रयोग लेना, खूब पानी पिना, पर्याप्त नींद तथा शाकाहारी जीवनशैली अपनाकर कोरोनो वायरस से बचा जा सकता है। डॉ. भटनागर ने बताया कि छोटे बच्चों, वृद्धों, डायबिटीज, हार्ट व फेफड़ों की बीमारी के साथ इम्यून डिजीज, एचआईवी, कैंसर, गर्भवती महिलाओं तथा मांसाहारी को इस वायरस से ज्यादा खतरा है।
डॉ. भटनागर ने बताया कि इसकी जांच में मरीज के कफ, खेंखार व नाक के स्वेब की जांच की जाती है जो कि भारत में मात्र नेशनल इस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में की जाती है। उपचार के लिए मरीज को आइसोलेशन में रखकर उसको संक्रमण व बुखार को रोकने की सिम्टोमेटिक दवायें दी जाती हैं जिनसे संक्रमण रुकता है और धीरे-धीरे मरीज खतरे से बाहर आ जाता है। फिलहाल इसका कोई वेक्सिन बाजार में उपलब्ध नहीं है।

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