उदयपुर सम्भाग के समग्र विकास के लिए ज्वलंत मुद्दे

-डॉ. तुक्तक भानावत-
विधानसभा चुनाव की सरगर्मी शुरू हो गई है। अलग-अलग दलों का अपने प्रत्याशियों को लेकर चुनाव प्रचार अंतिम चरण में चल रहा है। कुछ दलों और उनके प्रत्याशियों ने जीत के बाद किए जाने वाले कार्यों के संकल्प अथवा घोषणापत्र भी जारी किए हैं किन्तु वे उदयपुर संभाग के व्यापक दृष्टिïकोण को नहीं दर्शाते। इस सम्बंध में हमने विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर मतदाताओं से जानकारी प्राप्त की। इस बात को मद्देनजर रखते हुए कुछ सुझाव, प्रस्ताव, कार्ययोजना यहां उल्लेखित है जिस ओर जन प्रतिनिधियों का ध्यान आवश्यक है।
(1) उदयपुर में हाईकोर्ट बैंच की स्थापना होनी चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा केन्द्र को प्रस्ताव बना कर भेजा भी गया लेकिन आज तक उस पर जमीनी स्तर पर कोई परिणाम सामने नहीं आया।
(2) पर्यटन के विकास के लिए उदयपुर संभाग में पर्याप्त काम नहीं हुआ। आज उदयपुर टूरिस्ट सिटी के रूप में जाना जाता है लेकिन यहां आने वाले पर्यटकों को पार्किंग और ट्रेफिक जाम से मुक्ति नहीं मिल रही है और न रात को खाना नसीब होता है।
(3) खनन के क्षेत्र में सरकार की तरफ से कोई बड़ा कार्य नहीं किया गया। यहां पर खनन आधारित उद्योग लगाने चाहिए जिस पर काम नहीं हुआ और न ही किसी नए खनन को लेकर कोई खोज पर काम किया गया।  
(4) उदयपुर की नगर परिषद को नगर निगम और यूआईटी को यूडीए तो बना दिया लेकिन इसके बावजूद भी शहर की तस्वीर बदलने को लेकर बड़ा काम नहीं किया गया।
(5) आयड़ नदी को लेकर बरसों से सपने दिखाते हुए उसको प्रयोगशाला बना दिया गया लेकिन आयड़ की कायाकल्प की तस्वीर आज तक उदयपुर की जनता नहीं देख सकी। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद जरूरत इस बात की है कि आयड़ के विकास का टाइमलाइन के साथ काम होना चाहिए।
(6) महाराणा प्रताप से जुड़े पांच ऐतिहासिक स्थलों के (मेवाड़ कॉम्प्लेक्स योजना) कुम्भलगढ़, गोगुन्दा, चावंड के विकास पर बहुत पैसा खर्च किया गया लेकिन आज भी इन स्थानों की जो सूरत बदलनी चाहिए थी वह नहीं बदली।
(7) प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना लागू होने के बावजूद भी जिले में अनेक गांव आज भी सडक़ों से वंचित हैं।
(8) उदयपुर शहर में यूडीए बना हुआ है जिसका मुख्य उद्देश्य है कि गरीबों को मकान दिए जाए लेकिन आज भी गरीबों को सस्ता घर दिलाने पर कोई बड़ा काम नहीं हुआ है। यूडीए ने कुछ योजनाएं निकालने की औपचारिकताएं जरूर पूरी की हैं।
(9) संभाग में मार्बल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मार्बल पार्क बनाया जाना चाहिए।
(10) मावली से नाथद्वारा तक प्रस्तावित रेलमार्ग को मारवाड़ जंक्शन से जोडऩे पर केन्द्र ने सर्वे पर काम शुरू किया लेकिन जो भी इस क्षेत्र से जनप्रतिनिधि विधानसभा पहुंचते हैं उनको मजबूती से पीछे लगने की जरूरत है तब जाकर यह रास्ता विकास में बदलेगा।
(11) उदयपुर संभाग के दो नदी बेसिनों बनास और साबरमती के व्यर्थ बहकर जानेवाले पानी को रोकने की कोई बड़ी योजना प्रारंभ नहीं की गई। आज भी कोटड़ा का पानी गुजरात जा रहा है जिस पर नेताओं ने बातें बहुत कीं लेकिन काम नहीं किया। कोटड़ा का पानी मारवाड़ा ले जाने पर भी कवायद शुरू हो चुकी है और यहां अभी जनप्रतिनिधि इसमें कोई रूचि नहीं दिखा रहे हैं।
 (12) जिले के ग्रामीण इलाकों में फ्लोराइड की समस्या (सराड़ा-सलूम्बर) को दूर करने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया। ऐसे स्थान बढ़ते जा रहे हैं। जयसमंद झील के पास के इलाकों में भी स्थिति खराब है।
(13) टी.एस.पी. एरिया में शिक्षा के सुधार एवं विकास के लिए विशेष पैकेज की आवश्यकता आज भी है। यह मुददा कई जनप्रतिनिधि उठाते आ रहे हैं कि दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी जो टीएसपी में आते हैं वे आईएएस और आरएएस नहीं बनते हैं। इसमें जो कमियां है उसको ठीक करना चाहिए लेकिन होता ये है कि सरकार में आने के बाद वायदा करने वाले ही भूल जाते हैं।
(14) टी.एस.पी. एरिया में पेयजल, परिवहन, चिकित्सा एवं बिजली की समस्या के समाधान के लिए कारगर उपायों पर कुछ पैसा केन्द्र व राज्य से मिला लेकिन उसका पूरा उपयोग नहीं हुआ इसलिए सुविधाएं जनता को नहीं मिल पा रही है।
(15) संभाग में चिकित्सा व्यवस्था का विस्तार जरूरी है। कोरोना के समय इसकी परेशानियां हमारे सामने आई जब पूरे संभाग की जांचें उदयपुर में करनी पड़ी। जरूरत इस बात की है कि संभाग में हर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं पर सभी सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध हों।
(16) उदयपुर शहर में सिटी बसों के संचालन पर काम तो शुरू किया लेकिन जयपुर और जोधपुर की तरह पूरे उदयपुर शहर को कवर नहीं किया। इसका पूरा रूट मेप बनाने के साथ ही बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए ताकि जनता को सस्ती व सुलभ परिवहन की सुविधा मिल सके।  
(17) झील विकास प्राधिकरण की मांग उदयपुर से उठी और ये बन भी गया लेकिन इसका मुख्यालय जयपुर कर दिया गया जबकि सबसे ज्यादा झीलें उदयपुर में हंै इसलिए इसका मुख्यालय उदयपुर किया जाना चाहिए।
(18) प्रसंस्करण इकाइयों की और अधिक स्थापना की जानी चाहिए।
(19) देवास के अगले फेज के लिए बजट में जो घोषणाएं की हैं उनका जमीनी स्तर पर परिणाम आना चाहिए।
(20) उदयपुर शहर में यातायात के दबाव को देखते हुए कोर्ट चौराहा कलेक्टर बंगले से सिटी रेलवे स्टेशन तक फ्लाईओवर बनाना चाहिए।
(21) आदिवासी क्षेत्रों में उद्योग-धन्धे लगाये जाने चाहिए।
(22) आदिवासी क्षेत्रों में संचार सेवाओं का विस्तार किया जाना चाहिए।
(23)  उदयपुर संभाग की सबसे बड़ी माही बजाज सागर परियोजना का विस्तार होना चाहिए।
(24) खनिज नीति की समीक्षा की जानी चाहिए।
(25) आदिवासियों को खनन पट्टïे दिये जाने की बात कई बार उठी और सरकार ने काम भी किया लेकिन वास्तविक लाभ आदिवासी को नहीं मिला।
(26)  मौताणा प्रथा पर रोक लगाई जाए। इसके लिए कानून बनना चाहिए।
(27) खिरनी लकड़ी के जंगल विकसित किये जाएं ताकि लकड़ी के खिलौने का व्यवसाय फिर से आबाद हो सके।

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